कला जो दीवार नहीं, घर का हिस्सा बने: पलक गुप्ता का 'OBRA The Palak's' हयात सेंट्रिक, चंडीगढ़ में

17 अक्टूबर को एक दिवसीय प्रदर्शनी में कैनवास, लकड़ी, सिरेमिक और फ़ैब्रिक पर बनी मौलिक कलाकृतियाँ, क्यूरेटर फ़ेनी लूथरा गोयलचंडीगढ़, 10 अक्टूबर: कुछ कलाकृतियाँ बस जगह भरती हैं, और कुछ उस जगह का हिस्सा बन जाती हैं। इसी सोच के साथ चंडीगढ़ की कलाकार पलक गुप्ता का आर्ट स्टूडियो ‘OBRA The Palak’s’ अपनी प्रदर्शनी लेकर आ रहा है। यह प्रदर्शनी शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक हयात सेंट्रिक, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में आयोजित होगी।फ़ेनी लूथरा गोयल द्वारा क्यूरेट की गई यह प्रदर्शनी पलक की रचनात्मक यात्रा की एक झलक है। यहाँ दर्शक देखेंगे कि कैसे एक विचार कैनवास, लकड़ी, सिरेमिक, फ़ैब्रिक और कई अन्य माध्यमों में आकार लेता है।OBRA के पीछे की कलाकारपलक गुप्ता किसी एक शैली या एक माध्यम तक सीमित नहीं हैं। उनका स्टूडियो कला को सुकून भरी विलासिता के रूप में देखता है, ऐसी कला जिसे सिर्फ़ देखा नहीं, बल्कि उसके साथ जिया जाए।उनके काम में यह विविधता साफ़ दिखती है। मिट्टी जैसी दानेदार बनावट से उभरती एक विशाल हथिनी और उसका बच्चा। सुनहरी पृष्ठभूमि पर उभरे काले धब्बों से बना एक सोता हुआ तेंदुआ। ध्यानमग्न भगवान शिव, जिनके शरीर पर गायत्री मंत्र हाथ से लिखा गया है, और रुद्राक्ष की मालाएँ व त्रिशूल कैनवास से बाहर उभरते दिखते हैं।फिर माहौल बदलता है। टक्सीडो पहने तीन चिंपैंज़ी, जो ब्लैक एंड व्हाइट में पोकर खेल रहे हैं और हर पेंटिंग में लाल, नीले या हरे रंग की एक झलक है। फूलों वाली साड़ियों और कैट-आई सनग्लासेस में तीन भारतीय महिलाएँ, जो परंपरा और अंदाज़ दोनों को साथ लेकर चलती हैं। राजस्थानी हवेली सीरीज़, जो एक सजे हुए महल के दरवाज़े से शुरू होकर चाय के लिए सजी छत और झील किनारे ढलती शाम को निहारती एक महिला तक ले जाती है।इनके साथ हैं मिनिमल टेक्सचर वाली कृतियाँ भी: घास और ड्रैगनफ़्लाई वाले पूरी तरह सफ़ेद रिलीफ़ पैनल, हाथ से बनी टाइलों का ग्रिड जिसे एक लाल ब्लॉक तोड़ता है, और फ़िरोज़ी रंगों में घूमती पंखुड़ियाँ।इन सभी कृतियों को जोड़ती है उनकी बनावट और बारीकी। पलक की कई पेंटिंग्स रोशनी के साथ अपना रूप बदलती हैं, सुबह कुछ और, शाम को कुछ और।कलाकार के शब्दों में“स्टूडियो में लंबे समय से काम चल रहा था, अब उसे सबके साथ बाँटने का समय है। मैं चाहती हूँ कि लोग आएँ और उन्हें कोई ऐसी कृति मिले जो लगे कि वह पहले से ही उनके घर की है। कला सिर्फ़ दीवार भरने के लिए नहीं होती, वह उस जगह के एहसास का हिस्सा बननी चाहिए।”पलक गुप्ता, संस्थापक, OBRA The Palak’sचंडीगढ़ के लिए क्यों ख़ासचंडीगढ़ का कला और डिज़ाइन से गहरा रिश्ता रहा है। आज शहर में ऐसे कला-प्रेमी, आर्किटेक्ट और घर सजाने वाले लोग बढ़ रहे हैं जो निजी कहानी वाली मौलिक कला की तलाश में हैं। यह प्रदर्शनी उन्हें कलाकार से मिलने, कृतियों को नज़दीक से देखने और हर काम के पीछे की प्रक्रिया समझने का मौका देगी।इंटीरियर डिज़ाइनरों और आर्किटेक्ट्स के लिए भी यह घरों, होटलों और कॉर्पोरेट स्पेस के लिए खास कलाकृतियाँ चुनने का अच्छा अवसर है।प्रदर्शनी की जानकारीकार्यक्रमOBRA The Palak’s कला प्रदर्शनीकलाकारपलक गुप्ताक्यूरेटरफ़ेनी लूथरा गोयलतारीख़शनिवार, 17 अक्टूबर 2026समयसुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तकस्थानHyatt Centric, Sector 17, Chandigarhमाध्यमकैनवास, लकड़ी, सिरेमिक, फ़ैब्रिक और अन्यवेबसाइटobrathepalaks.com

Oct 10, 2026 - 21:00
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कला जो दीवार नहीं, घर का हिस्सा बने: पलक गुप्ता का 'OBRA The Palak's' हयात सेंट्रिक, चंडीगढ़ में

17 अक्टूबर को एक दिवसीय प्रदर्शनी में कैनवास, लकड़ी, सिरेमिक और फ़ैब्रिक पर बनी मौलिक कलाकृतियाँ, क्यूरेटर फ़ेनी लूथरा गोयल

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर: कुछ कलाकृतियाँ बस जगह भरती हैं, और कुछ उस जगह का हिस्सा बन जाती हैं। इसी सोच के साथ चंडीगढ़ की कलाकार पलक गुप्ता का आर्ट स्टूडियो ‘OBRA The Palak’s’ अपनी प्रदर्शनी लेकर आ रहा है। यह प्रदर्शनी शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक हयात सेंट्रिक, सेक्टर 17, चंडीगढ़ में आयोजित होगी।

फ़ेनी लूथरा गोयल द्वारा क्यूरेट की गई यह प्रदर्शनी पलक की रचनात्मक यात्रा की एक झलक है। यहाँ दर्शक देखेंगे कि कैसे एक विचार कैनवास, लकड़ी, सिरेमिक, फ़ैब्रिक और कई अन्य माध्यमों में आकार लेता है।

OBRA के पीछे की कलाकार

पलक गुप्ता किसी एक शैली या एक माध्यम तक सीमित नहीं हैं। उनका स्टूडियो कला को सुकून भरी विलासिता के रूप में देखता है, ऐसी कला जिसे सिर्फ़ देखा नहीं, बल्कि उसके साथ जिया जाए।

उनके काम में यह विविधता साफ़ दिखती है। मिट्टी जैसी दानेदार बनावट से उभरती एक विशाल हथिनी और उसका बच्चा। सुनहरी पृष्ठभूमि पर उभरे काले धब्बों से बना एक सोता हुआ तेंदुआ। ध्यानमग्न भगवान शिव, जिनके शरीर पर गायत्री मंत्र हाथ से लिखा गया है, और रुद्राक्ष की मालाएँ व त्रिशूल कैनवास से बाहर उभरते दिखते हैं।

फिर माहौल बदलता है। टक्सीडो पहने तीन चिंपैंज़ी, जो ब्लैक एंड व्हाइट में पोकर खेल रहे हैं और हर पेंटिंग में लाल, नीले या हरे रंग की एक झलक है। फूलों वाली साड़ियों और कैट-आई सनग्लासेस में तीन भारतीय महिलाएँ, जो परंपरा और अंदाज़ दोनों को साथ लेकर चलती हैं। राजस्थानी हवेली सीरीज़, जो एक सजे हुए महल के दरवाज़े से शुरू होकर चाय के लिए सजी छत और झील किनारे ढलती शाम को निहारती एक महिला तक ले जाती है।

इनके साथ हैं मिनिमल टेक्सचर वाली कृतियाँ भी: घास और ड्रैगनफ़्लाई वाले पूरी तरह सफ़ेद रिलीफ़ पैनल, हाथ से बनी टाइलों का ग्रिड जिसे एक लाल ब्लॉक तोड़ता है, और फ़िरोज़ी रंगों में घूमती पंखुड़ियाँ।

इन सभी कृतियों को जोड़ती है उनकी बनावट और बारीकी। पलक की कई पेंटिंग्स रोशनी के साथ अपना रूप बदलती हैं, सुबह कुछ और, शाम को कुछ और।

कलाकार के शब्दों में

“स्टूडियो में लंबे समय से काम चल रहा था, अब उसे सबके साथ बाँटने का समय है। मैं चाहती हूँ कि लोग आएँ और उन्हें कोई ऐसी कृति मिले जो लगे कि वह पहले से ही उनके घर की है। कला सिर्फ़ दीवार भरने के लिए नहीं होती, वह उस जगह के एहसास का हिस्सा बननी चाहिए।”

पलक गुप्ता, संस्थापक, OBRA The Palak’s

चंडीगढ़ के लिए क्यों ख़ास

चंडीगढ़ का कला और डिज़ाइन से गहरा रिश्ता रहा है। आज शहर में ऐसे कला-प्रेमी, आर्किटेक्ट और घर सजाने वाले लोग बढ़ रहे हैं जो निजी कहानी वाली मौलिक कला की तलाश में हैं। यह प्रदर्शनी उन्हें कलाकार से मिलने, कृतियों को नज़दीक से देखने और हर काम के पीछे की प्रक्रिया समझने का मौका देगी।

इंटीरियर डिज़ाइनरों और आर्किटेक्ट्स के लिए भी यह घरों, होटलों और कॉर्पोरेट स्पेस के लिए खास कलाकृतियाँ चुनने का अच्छा अवसर है।


प्रदर्शनी की जानकारी



कार्यक्रम

OBRA The Palak’s कला प्रदर्शनी

कलाकार

पलक गुप्ता

क्यूरेटर

फ़ेनी लूथरा गोयल

तारीख़

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

समय

सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक

स्थान

Hyatt Centric, Sector 17, Chandigarh

माध्यम

कैनवास, लकड़ी, सिरेमिक, फ़ैब्रिक और अन्य

वेबसाइट

obrathepalaks.com

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